बरीक्षा पूजन

"वर बारीक्षा"

विवाह से पूर्व बरीक्षा का संक्षिप्त विधान कुछ इस प्रकार है- वर पूर्वाभिमुख तथा बरीक्षा करने वाले, पिता, चाचा, ताऊ, काका अथवा भाई पश्चिमाभिमुख बैठकर निम्नकृत्य सम्पन्न करें- मंगलाचरण, षट्कर्म, तिलक, कलावा, कलशपूजन, गुरुवन्दना, गौरी-गणेश पूजन, सर्वदेव नमस्कार, स्वस्तिवाचन आदि। इसके बाद कन्या के पिता यथोचित स्वागत-सत्कार – पैर धुलवाएं, आचमन करें तथा हल्दी से तिलक करके अक्षत लगाएं । अब कन्या के पिता, ‘वर’ को प्रदान की जाने वाली समस्त सामग्री, जैसे – थाली, फल-फूल, द्रव्य-वस्त्रादि, हाथ में लेकर आचार्य द्वारा संकल्प मन्त्र बोलते हुए वर को प्रदान करें तथा वर को मिष्ठान खिलाएं एवं जल पिलाएं। तत्पश्चात् क्षमा प्रार्थना, नमस्कार, कर अचार्य को दक्षिणा दें। नाई को न्योछावर करके दें। इसके उपरांत पूजन का विसर्जन कर शान्ति पाठ करते हुए बरीक्षा पूजन संपन्न करें।

धन्यवाद

लक्ष्मी नारायण भगवान की जय।।

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