मानस अमृत परिवार का संचालन मानस अमृत सेवा संस्थान द्वारा किया जा रहा है, जो कि भारत सरकार की सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम १८६० के तहत रजिस्ट्रीकृत संस्था है। मानस अमृत परिवार का उद्देश्य जनसाधारण का सामाजिक, मानसिक, नैतिक, चारित्रिक, शैक्षिक, बौद्धिक व आध्यात्मिक विकास करना एवं जनमानस में देश प्रेम एवं वैचारिक सामन्जस्य का विकास करना है। जिसके लिए…
- श्री रामचरित मानस की कथाओं द्वारा जनमानस में श्रेष्ठ जीवन मूल्यों की स्थापनार्थ वैचारिक क्रान्ति लाना संस्था का प्रमुख ध्येय है।
- समय समय पर सत्संग, सांस्कृतिक समारोह एवं कीर्तन तथा आरती का आयोजन कराना।
- गरीब कन्याओं की शादी-ब्याह में आर्थिक सहयोग देना तथा दहेज रहित नि:शुल्क विवाह का आयोजन कराना।
- संस्कृति संरक्षण हेतु वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए वैदिक विद्यालयों, पुस्तकालयों, एवं छात्रावास की स्थापना करना।
- स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नि:शुल्क चिकित्सा कैम्पों आयोजन करना एवं चिकित्सालय बनवाना।
- स्वस्थ समाज निर्माणार्थ योगशाला, व्यायामशाला, यज्ञशालाओं का निर्माण कराना।
- जनहितार्थ, समाज के उपेक्षित जनमानस हेतु अनाथालय, वृद्धाश्रम, विधवा आश्रमों की स्थापना करना।
- आर्थिक सुदृढ़िकरण के लिए जनमानस को स्वरोजगारपरक शिक्षा के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन कराना।
- गौ सेवा हेतु गौशाला की स्थापना करना तथा गौमूत्र, गोबर, गौघृत आदि का शोधन करना एवं उससे निर्मित औषधियों का प्रचार-प्रसार करना।
- गौ हत्या का विरोध कर लोगों को गौसेवार्थ प्रेरित करना।
- स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण कराना, औषधिय पौधौं की खेती करने व विकास हेतु लोगों को जागरूक करना।
- दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंगों का निर्माण कराना, एवं आवश्यक प्रशिक्षणों का आयोजन कराना।
- परिवार नियोजन, महिला कल्याण, समाज कल्याण आदि समाज हित की सरकारी योजनाओं का क्रियान्यवयन करना एवं प्रचार-प्रसार करना भी संस्था के नैतिक कर्तव्य के रूप में सम्मिलित करना।
संस्था के प्रमुख कार्यपालक परम् पूज्य महाराज श्री जितेन्द्र दीक्षित जी के द्वारा संस्था के अन्य उपांगों पर भी प्रमुखता से कार्य का भविष्यागत क्रियान्वयन :-
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मानस दैवीय आपदा सहायता कोष / Manas Daiviya Aapada Sahayata kosh
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गौ, गंगा, गीता, गायत्री, मानस, तुलसी जैसे भारतीय संस्कृति के मूल स्तंभों का संरक्षण एवं संवर्धन












