कालसर्प दोष निवारण पूजा

"कालसर्प दोष क्या है?"

ऐसा माना जाता है, कि कालसर्प दोष एक ऐसा योग है, जो जातक के पूर्व जन्म के किसी घोर अपराध अथवा किसी श्राप के फल स्वरूप उसकी कुंडली में प्रतिबंधित होता है।

एक कुंडली में जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में समा जाते हैं, तो उसे कालसर्प दोष कहते हैं l

मल रूप से कालसर्प योग बारह प्रकार के होते हैं :

१.  अनंत कालसर्प योग

२.  कुलिक कालसर्प योग

३.  वासुकि कालसर्प योग

४.  शंखपाल कालसर्प योग

५.  पदम् कालसर्प योग

६.  महा पदम् कालसर्प योग

७.  तक्षक कालसर्प योग

८.  कारकोटक कालसर्प योग

९.  शंखचूड़ कालसर्प योग

१०. घातक कालसर्प योग

११. विषधर कालसर्प योग

१२. शेषनाग कालसर्प योग।

"कालसर्प दोष के परिणाम।"

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कालसर्प दोष एक व्यक्ति के जीवन में अनेक रुकावटें पैदा करता है, अतः इस दोष के कारण व्यक्ति के जीवन में बहुत सारी बाधाएँ आती हैं। इस दोष से पीड़ित व्यक्ति महत्वाकांक्षी होते हुए भी पूर्ण सफलता पाने से वंचित रह जाते हैं, तथा शारीरिक रूप से किसी न किसी कष्ट से पीड़ित रहते हैं।

"कालसर्प दोष निवारण हेतु उपाय।"

कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को प्रति दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना करनी चाहिए, इससे सभी कार्य आसान हो जायेंगे। कालसर्प दोष से पीड़ित विद्यार्थियों को माँ सरस्वती के बीज मन्त्र का प्रति दिन एक वर्ष तक जप करना चाहिए l किसी शुभ मुहूर्त में बहते हुए पानी में तीन बार कोयले को प्रवाहित करना चाहिए । प्रति दिन हनुमान चालीसा का एक सौ आठ बार पाठ करना चाहिए। प्रति दिन रूद्राक्ष की माला से महामृत्युंजय मन्त्र का एक सौ आठ बार जप करना चाहिए। ऐसा करने से भी अनंत कालसर्प दोष शांत हो जाते हैं। घर में मोर का पंख रखने से भी कालसर्प दोष का प्रभाव अधिक नही होता।

"कालसर्प दोष से डरने की आवश्यकता नहीं।"

ज्योतिष गणना के अनुसार जिसमें सबसे ज्यादा भय लगता है, वह है – शनि की ढैया, साढ़ेसाती, राहु, केतु तथा कालसर्प दोष। कई लोग कालसर्प दोष से पीड़ित होते हैं, और उसके नुकसान उठाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इस दोष को सर्प दोष कहा गया है, लेकिन कालांतर में इसका नाम कालसर्प दोष पड़ गया। कालसर्प दोष प्रमुखतः 12 प्रकार के होते हैं।

जब कुंडली में राहु और केतु के बीच सारे ग्रह आ जाएं तो उसे कालसर्प दोष कहा जाता है। राहु मुख है, और केतु उसकी पूंछ। मुख और पूंछ के बीच जब समस्त ग्रह आ जाएं तो ये सांप जैसी आकृति कुंडली में बनाते हैं।

वैसे तो कालसर्प दोष के कई नुकसान बताए गए हैं। किन्तु इसका सबसे बड़ा नुकसान है, भ्रमित होना l चूंकि इस दोष में राहु (जिसे राक्षस का सिर माना गया है) सारे ग्रहों के आगे होता है, अतः वह अपने राक्षसी स्वभाव के कारण नुकसान कराता है। इस दोष के कारण व्यक्ति हमेशा भ्रम में रहता है, तथा किसी बात का सही निर्णय नहीं ले पाता। इसी कारणवश वह हमेशा गलत फैसले लेता है, तथा फल स्वरूप नुकसान उठाता है।

"एक नई आदत बनाएं।"

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है, तो आप एक आदत बदल दें – खुद फैसले लेने की। कालसर्प दोष में सबसे बड़ा नुकसान यह होता है, कि व्यक्ति को जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना होता है, तो उसके सामने एक से अधिक विकल्प आ जाते हैं, जो उसे दुविधा में डालते हैं। यदि आप कालसर्प दोष से पीड़ित हैं, तो सबसे पहले खुद कोई निर्णय लेने की आदत को छोड़ दें। जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना हो, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति जैसे – जीवनसाथी, माता-पिता, भाई-बहन या किसी मित्र से सलाह जरूर लें। इससे आपको कालसर्प दोष का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

"कालसर्प दोष के लक्षण"

  1. मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त न होना।
  2. व्यवसाय में बार-बार हानि होना।
  3. अपनों से ठगा जाना।
  4. अकारण कलंकित होना।
  5. संतान नहीं होना अथवा संतान की उन्नति नहीं होना।
  6. विवाह नहीं होना या वै‍वाहिक जीवन अस्त-व्यस्त होना।
  7. स्वास्थ्य खराब होना।
  8. बार-बार चोट अथवा दुर्घटनाओं से ग्रसित होना।
  9. अच्‍छे किए गए कार्यों का यश दूसरों को मिलना।
  10. निरंतर भयावह स्वप्न आना, बार-बार नाग-नागिन का दिखना।
  11. काली स्त्री, जो भयावह या विधवा हो, का रोते हुए दिखना।
  12. मृत व्यक्ति का स्वप्न में कुछ मांगना, बारात दिखना, जल में डूबना, मुंडन दिखना, अंगहीन दिखना।
  13. गर्भपात होना या संतान होकर नहीं रहना।

आदि लक्षणों में से कोई एक भी हो तो कालसर्प दोष की शांति हेतु पूजा करवाएं। 

"नागपंचमी के दिन किए जाने वाले कुछ प्रयोग।"

  • निम्नलिखित प्रयोगों को करने से कालसर्प दोष शिथिल होता है-
  1. चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा बनवाकर पूजन कर जल में प्रवाहित करें।
  2. नारियल पर ऐसा ही जोड़ा बनाकर मौली से लपेटकर जल में प्रवाहित करें।
  3. सपेरे को पैसे देकर नाग या नाग-नागिन का जोड़ा जंगल में स्वतंत्र करें।
  4. किसी ऐसे शिव मंदिर में, जहां शिवजी पर नाग न हों, वहां प्रतिष्ठा करवाकर नाग चढ़ाएं।
  5. चंदन की लकड़ी से बने 7 मौली प्रत्येक बुधवार या शनिवार को शिव मंदिर में चढ़ाएं।
  6. शिवजी को चंदन एवं चंदन का इत्र चढ़ाएं तथा नित्य स्वयं भी लगाएं।
  7. नागपंचमी को शिव मंदिर की सफाई, मरम्मत तथा पुताई करवाएं।
  8. निम्न मंत्रों से जप-हवन करें या करवाएं।

ॐ नागदेवतायै नम:‘ या नागपंचमी मंत्र  ‘ॐ नागकुलाय विदमय विषदन्ताय धीमहि तन्नौ सर्प प्रचोद्यात्।’

  1. शिवजी को विजया, अर्क पुष्प, धतूर पुष्प, फल चढ़ाएं तथा दूध से रुद्राभिषेक करवाएं।
  2. अपने वजन के बराबर कोयला पानी में प्रवाहित करें।

"कालसर्प दोष कितने वर्ष तक रहता है....."

  • कुंडली में राहु-केतु के अंश, उनकी स्थिति तथा दृष्टि देखकर ही कालसर्प योग की पूजा करवाना उचित माना जाता है। कभी-कभी व्यक्ति 35 वर्ष की आयु तक आराम का जीवन व्यतीत करता है, और अचानक उसे धन हानि होने लगती है, वह गरीब हो जाता है। जबकि कुछ लोग 35 वर्ष तक गरीब रहते हैं, और अचानक से धनवान हो जाते हैं।

"कालसर्प योग क्यों होता है?"

  • जन्म लेने तथा उसके बाद भविष्य के निर्माण के समय यदि राहु या इससे युति ग्रह अथवा राहु के नक्षत्र में स्थित किसी ग्रह की दशा हो तो कालसर्प योग का असर अधिक होता है।

"काल सर्प योग की पूजा कहाँ होती है...?"

  • सबसे पहले जातक अपनी जन्म कुंडली या जन्म पत्रिका किसी आचार्य को दिखाएं, ताकि उसमें क्या दोष हैं, किस तरह की पूजा करवाई जानी चाहिए, इसका पता चल सके। इसके बाद ही तीर्थ नगरी उज्जैन जाकर दोष से संबंधित पूजा करवाई जानी चाहिए।

धन्यवाद

प्रेम से बोलें हर हर महादेव l

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